2021 हनुमानगढ़ जिले से जुडी जानकारी और इतिहास।

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम है सुनील, आज की इस पोस्ट में मैंने आपको हनुमानगढ़ जिले से जुडी विभिन्न जानकारियां (Full Information about hanumangarh city in hindi) वो भी एक ही पोस्ट में देने का प्रयास किया है, ताकि आपको आपके शहर अथवा जिले से जुडी सभी जानकारी रहे।

हनुमानगढ़ जिले से जुडी जानकारी और इतिहास।

हनुमानगढ़ जिले का इतिहास और अन्य जानकारी (hanumangarh ki history in hindi)

शहर/जिला   हनुमानगढ़
प्राचीन/पुराना नाम क्या है? भटनेर
भटनेर का हनुमानगढ़ नाम
कब पड़ा?
 सन्1805 में
हनुमानगढ़ शहर जिला
कब बना?
आजादी के पश्चात् 12 जुलाई
1994 को
हनुमानगढ़ शहरमें कितनी
तहसीले है?
सात तहसील (नोहर, भादरा, टिब्बी, संगरिया,
रावतसर, पीलीबंगा, हनुमानगढ़)
हनुमानगढ़ की सबसे छोटी तहसील 
कोनसी है?
टिब्बी तहसील
हनुमानगढ़ की सबसे बड़ी तहसील कोनसी
है?
हनुमानगढ़ तहसील
हनुमानगढ़ जिले में कुल
कितने गाँव है?
लगभग 1907 गाँव
हनुमानगढ़ की साक्षरता दर 
क्या है?
हनुमानगढ़ की साक्षरता दर 68.37% है ।
हनुमानगढ़ जिले का क्षेत्रफल
कितना है?
12,645 वर्ग किमी.(विकिपीडिया के अनुसार) 
हनुमानगढ़ जिले की जनसँख्या
कितनी है?
17,79,650 (वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार)
हनुमानगढ़ की मुख्य भाषाये कोनसी है? हिंदी, राजस्थानी
हनुमानगढ़ में वर्ष में औसतन वर्षा 
कितनी होती है?
225 से 300 मिमी
हनुमानगढ़ का पिन कोड क्या है? 335513
हनुमानगढ़ का एसटीडी कोड क्या है?911552
हनुमानगढ़ में वर्तमान विधायक 
कौन है?
डॉ. राम प्रताप
हनुमानगढ़ में वर्तमान जिला मजिस्ट्रेट 
कोन है?
अर्चना सिंह
अन्य जानकारी जल्द सम्पादित करेंगे

हनुमानगढ़ शहर की स्थापना कैसे हुयी?

हनुमानगढ़ शहर प्राचीनकाल में भटनेर के नाम से विख्यात  था, क्योंकि यहाँ भाटी राजपूतों का शासन था।
भटनेर के इस प्राचीनतम किले का निर्माण  सन् 285 में जैसलमेर के भाटी राजपूत भूपत सिंह के द्वारा करवाया गया था।
सन् 1805 में एक युद्ध में राजा सूरत सिंह जो की बीकानेर के राजा थे, उन्होंने इस किले को भाटियों से जीत लिया, और राजा सूरत सिंह की इस विजय का दिन मंगलवार था, और उसी दिवस को आधार मानकर राजा सूरत सिंह ने भटनेर का नाम बदलकर "हनुमानगढ़" रख दिया, क्योंकि यह विजय उन्हें मंगलवार के शुभ दिवस पर मिली थी, जो की हनुमान जी का दिन होता है।

हनुमानगढ़ शहर को जिला कब बनाया गया?

आजादी के पश्चात् 12 जुलाई 1994 को श्री गंगानगर जिले से पृथक कर हनुमानगढ़ शहर को राजस्थान का 31वां जिला बनाया गया

हनुमानगढ़ जिले में दार्शनिक स्थल कौन-कौन से है?

1.भटनेर का किला- हनुमानगढ़ शहर में भटनेर दुर्ग (Bhatner Fort) बहुत ही प्राचीन धरोहर है, जिसे सन 285 में बनवाया गया था। इस किले का निर्माण मजबूत ईंटों और पत्थरों से किया गया है। 

भटनेर के इस दुर्ग को उस समय का सबसे मजबूत किला माना जाता था, यहाँ तक की 14वीं शताब्दी के एक शासक तैमुरलंग जिन्हें तिमुर और तैमुर के नाम से जाना जाता था, उन्होंने अपनी जीवनी 'तुजुके तैमुर' में इस किले को  हिन्दुतान का सबसे मजबूत किला बताया है
इस प्रकार यह किला हनुमानगढ़ के सभी दार्शनिक स्थलों में एक मुख्य दार्शनिक स्थल है।

हनुमानगढ़ का भटनेर का किला
               
2.कालीबंगा- हनुमानगढ़ जिले का कालीबंगा शहर (kalibanga) मुख्य ऐतिहासिक स्थलों में से एक है, इतना ही नहीं कालीबंगा
शहर 4,000 ईसा पूर्व से भी अधिक एक प्राचीन सभ्यता मानी जाती है। 
कालीबंगा शहर में सम्पूर्ण विश्व में सर्वप्रथम जोता गया खेत देखने को मिला है, और यह भी कहा जाता है की लगभग 2900 ई.पूर्व यहाँ एक पूर्ण रूप से विकसित नगर था। सन् 1952 में सबसे पहले 'अमलानंद घोष' ने इस स्थल की खोज की थी

कालीबंगा की तस्वीर
                    
3.कबूतर साहिब गुरुद्वारा- हनुमानगढ़ जिले के नोहर शहर में में स्थित 'कबूतर साहिब गुरुद्वारा' जिसके बारे में कहा जाता है, की 20 नवंबर 1906 को गुरु गोविन्द सिंह जी यहाँ नोहर शहर में आकर रुके थे और उन्होंने यहाँ विश्राम भी किया था।
इस गुरूद्वारे से सम्बंधित दो घटनाये है, पहली जिसमे कहा जाता है, की गुरुदेव ने मृत कबूतरों को जीवित किया था। और दूसरी घटना में कहा जाता है, की यहाँ के एक पुराने कुए के खारे पानी को गुरुदेव ने मीठे पानी में बदल दिया था। इन्ही घटनाओ के बाद यहाँ इस गुरूद्वारे के स्थापना की गयी थी।

4.गोगामेड़ी- गोगामेड़ी हनुमानगढ़ जिले में नोहर शहर से लगभग 32 किमी. की दुरी पर स्थित है। यहाँ एक महानतम राजा, गुरुभक्त और एक वीर योद्धा गोगाजी का मंदिर है, जो गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य थे। 
इस स्थान पर गुरु गोरखनाथ जी ने 12 वर्ष तक कठिन तपस्या की थी। भाद्रपद माह में यहाँ नवमी के दिन मेला लगत है, जिसके बारे में यह खाश बात है की यहाँ सभी धर्मो के लोग दर्शन को आते है।

हनुमानगढ़ गोगामेडी photo
               
5.सिल्ला माताजी का मंदिर- यह मंदिर अठाहरवी शताब्दी में स्थापित लिया गया था। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, की यहाँ मंदिर में जो शिला (पत्थर) स्थित है वह घग्घर नदी के बहाव में यहाँ आया था।
इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की यहाँ इस मंदिर में जो कोई भी शिला पर दूध और पानी चढ़ाता है, उसे त्वचा से सम्बंधित रोगों से मुक्ति मिलती है। 

6.गुरद्वारा सुखवंतसिंह मह्ताबसिंह- जब भाई सुखवंतसिंह और मह्ताब्सिंह मस्सा रंघड़ का सिर कलम करके वापस बुड्ढा जौहड़ को लौट रहे थे, तब इन दोनों भाइयों ने इस स्थान पर रूककर आराम किया था।

7.तालवाड़ झील- इस स्थान के बारे में कहा जाता है की यहाँ राजा पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी के मध्य तराइन का युद्ध लड़ा गया था।

8.भद्रकाली मंदिर- यह मंदिर घग्घर के किनारे पर स्थित है, जो माता काली का प्राचीन मंदिर है।

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